Author: Dr.Priyabhishek Sharma

Himalayi guru ke padachinho me | हिमालयी गुरु के पदचिन्हों में | हिंदी बुक

  • Pages : 352
  • Category : Spiritual
  • ISBN : ‎ 9788169565110
  • Publisher : MyMirror Publishing House Pvt.Ltd.
  • Availability : In Stock
  • Edition :
  • Dimensions : 21 cm * 3 cm* 14 cm

Product Summery

paperback

₹ 359 ₹ 399


Qty:

Tab Article

मुझे नहीं पता था कि उस जन्माष्टमी के दिन गुरुदेव ने मुझ पर क्या कर दिया था ! छह महीनों से जिन रहस्यमयी अंतर्नादों ने मुझे व्याकुल कर रखा था, वे अचानक ओंकार की एक शांत प्रतिध्वनि में बदल गए। तब मुझे अहसास हुआ कि मैं चाहे कुछ भी करूँ, यह ओंकार हर समय पृष्ठभूमि में गूँज रहा था। एक प्रचंड ऊर्जा मेरी रीढ़ में कभी ऊपर तो कभी नीचे की ओर उमड़ती और मेरी सांसें थाम लेती। जब मैं ध्यान से बाहर आता, तो पाता कि मेरा सिर स्वतः ही जालंधर बंध की योग मुद्रा में जकड़ा हुआ है। यहीं से सिद्धों के स्थानों की मेरी यात्राएं शुरू हुईः गुफाएँ, मंदिर, पर्वत-वे स्थान जिनके बारे में कुछ साल पहले तक मैंने सुना भी नहीं था। जीवन पूरी तरह से पटरी से उतर गया, नियंत्रण मेरे हाथों से किसी रहस्यमयी बाहरी शक्ति ने छीन लिया। एक-एक कर, बचपन की भूली-बिसरी यादें सतह पर आने लगीं। मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा, जिसने मुझे सोचने पर मजबूर कर दियाः क्या आध्यात्मिक जीवन ऐसा ही होता है?

पाँच साल बाद, मुझे समझ आया कि यह एक सिद्ध का 'शक्तिपात' था जो अपना काम कर रहा था। अंकुरित होने को तैयार कर्मों के बीजों को आध्यात्मिक जागरण की अग्नि में भस्म होना ही था। यह कठिन और परीक्षा लेने वाली प्रक्रिया कब तक चलेगी? कोई नहीं जानता था। केवल बर्फीली चोटियों पर बने पदचिह्न मुझे इस आश्वासन के साथ पुकार रहे थे कि यदि उनका निर्माण करने वाला-वह परमसिद्ध हिमालयी गुरु-अपने संकल्प मात्र से शक्तिपात कर सकता है, तो फिर डर कैसा?

0 REVIEW FOR Himalayi guru ke padachinho me | हिमालयी गुरु के पदचिन्हों में | हिंदी बुक

ADD A REVIEW

Your Rating

RELATED BOOKS